मुगल वंश का प्रथम संस्थापक कौन है? - mugal vansh ka pratham sansthaapak kaun hai?

मुगल साम्राज्य 1526 में शुरू हुआ, मुगल वंश का संस्थापक बाबर था, अधिकतर मुगल शासक तुर्क और सुन्नी मुसलमान थे. मुगल शासन 17 वीं शताब्दी के आखिर में और 18 वीं शताब्दी की शुरुआत तक चला और 19 वीं शताब्दी के मध्य में समाप्त हुआ.

जानिए बाबर के बारे में
(1) बाबर ने 1526 ई से 1530 ई तक शासन किया.

(2) 24 फरवरी, 1483 ई. को फ़रग़ना में 'ज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर' का जन्म हुआ.

(3) बाबर अपने पिता की ओर से तैमूर का पांचवा एवं माता की ओर से चंगेज खान का चौदहवां वंशज था.

(4) बाबर के पिता उमरशेख मिर्जा फरगाना नाम के छोटे से राज्य के शासक थे.

(5) बाबर फरगाना की गद्दी पर 8 जून 1494 ई में बैठा.

(6) बाबर ने 1507 ई में बादशाह की उपाधि धारण की, जिसे अब तक किसी तैमूर शासक ने धारण नहीं की थी.

(7) बाबर की मातृभाषा चग़ताई भाषा थी लेकिन फारसी में बाबर को महारत हासिल थी. उसने चगताई में बाबरनामा के नाम से अपनी जीवनी लिखी थी.

(8) 1526 ई. में पानीपत के प्रथम युद्ध में दिल्ली सल्तनत के अंतिम वंश (लोदी वंश) के सुल्तान इब्राहीम लोदी की पराजय के साथ ही भारत में मुग़ल वंश की स्थापना हो गई.

(9) इस वंश का संस्थापक "ज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर" था. केवल 22 साल में क़ाबुल पर अधिकार कर अफ़ग़ानिस्तान में राज्य कायम किया था.

(10)
बाबर ने भारत पर पांच बार आक्रमण किया.

(11) बाबर को भारत पर आक्रमण करने का निमंत्रण पंजाब के शासक दौलत खान लोदी और मेवाड़ के शासक राणा सांगा ने दिया था.

(12) बाबर द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्ध थे:
(i) पानीपत का प्रथम युद्ध 21 अप्रैल, 1526 ई. को इब्राहिम लोदी और बाबर के बीच हुआ, जिसमें बाबर की जीत हुई.
(ii) खनवा का युद्ध 17 मार्च 1527 ई में राणा सांगा और बाबर के बीच हुआ, जिसमें बाबर की जीत हुई.
(iii) चंदेरी का युद्ध 29 मार्च 1528 ई में मेदनी राय और बाबर के बीच हुआ, जिसमें बाबर की जीत हुई.
(iv) घाघरा का युद्ध 6 मई 1529 ई में अफगानो और बाबर के बीच हुआ, जिसमें बाबर की जीत हुई.

(13) पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने पहली बार तुगल्लमा युद्ध नीति का इस्तेमाल किया.

(14) उस्ताद अली और मुस्तफा बाबर के दो निशानेबाज थे, जिसने पानीपत के प्रथम युद्ध में भाग लिया था.

(15) पानीपत के युद्ध में लूटे गए धन को बाबर ने अपने सैनिक अधिकारियों, नौकरों एवं सगे सम्बन्धियों में बांट दिया. इस बंटवारे में हुमायूं को वह कोहिनूर हीरा प्राप्त हुआ, जिसे ग्वालियर नरेश ‘राजा विक्रमजीत’ से छीना गया था. इस हीरे की क़ीमत के बारे में यह माना जाता है कि इसके मूल्य द्वारा पूरे संसार का आधे दिन का ख़र्च पूरा किया जा सकता था.

(16) भारत विजय के ही उपलक्ष्य में बाबर ने प्रत्येक क़ाबुल निवासी को एक-एक चांदी का सिक्का उपहार स्वरूप प्रदान किया था. अपनी इसी उदारता के कारण उसे ‘कलन्दर’ की उपाधि दी गई .

(17) खानवा के युद्ध में जीत के बाद बाबर को गाजी की उपाधि दी गई.

(18) 48 साल में 27 सितंबर में 1530 ई को आगरा में बाबर की मृत्यु हो गई.

(19) बाबर के शव को पहले आगरा के आरामबाग में दफनाया गया, बाद में काबुल में उसके द्वारा चुने गए स्थान पर दफनाया गया. जहां उसका मकबरा बना हुआ है. उसके बाद उसका ज्येष्ठ पुत्र हुमायूं मुग़ल बादशाह बना.

(20) बाबर ने अपनी आत्मकथा 'बाबरनामे' की रचना की थी, जिसका अनुवाद बाद में अब्दुल रहीम खानखाना ने किया.

(21) बाबर को मुबईयान नाम की पद्द शैली का जन्मदाता भी कहते हैं.

(22) बाबर का उत्तराधिकारी हुमायूं हुआ.

मुगल बादशाहों (या मुगल) ने भारतीय उपमहाद्वीप पर मुगल साम्राज्य का निर्माण और शासन किया, जो मुख्य रूप से भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के आधुनिक देशों के अनुरूप था। मुगलों ने 1526 से भारत के कुछ हिस्सों पर शासन करना शुरू किया और 1700 तक अधिकांश उप-महाद्वीपों पर शासन किया। उसके बाद वे तेजी से गिरावट आई, लेकिन 1850 के दशक तक मुख्य रूप से शासित प्रदेश थे। मुग़ल मध्य एशिया के तुर्को-मंगोल मूल के तिमुरिद वंश की एक शाखा थे। उनके संस्थापक बाबर, फ़रगना घाटी (आधुनिक उज्बेकिस्तान में) से एक तैमूर राजकुमार थे, तैमूर का प्रत्यक्ष वंशज था (जिसे आमतौर पर पश्चिमी देशों में तामेरलेन के नाम से जाना जाता था) और तैमुर के साथ एक चंगेज राजकुमारी की शादी के बाद चंगेज खान से संबद्ध था।

मुग़ल साम्राज्य के बादशाह
पूर्व राजशाही
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चित्र:File:Bahadur Shah II of India.jpg
बहादुर शाह II
प्रथम राजा बाबर
अंतिम राजा बहादुर शाह II
प्रकार His Imperial Majesty
आधिकारिक निवास लाल किला
नियोक्ता Hereditary
राजशाही की शुरुआत २० अप्रैल १५२६
राजशाही का अंत २१ सितंबर १८५७
वर्तमान दावेदार Javaid Jah Bahadur

बाद के कई मुगल बादशाहों के पास शादी के गठबंधन के माध्यम से महत्वपूर्ण भारतीय राजपूत और फारसी वंश थे, क्योंकि राजपूत और फारसी राजकुमारियों के लिए सम्राट पैदा हुए थे। उदाहरण के लिए, अकबर आधा फ़ारसी था (उसकी माँ फ़ारसी मूल की थी), जहाँगीर आधा राजपूत और क्वार्टर-फ़ारसी था, और शाहजहाँ तीन-चौथाई राजपूत था।

औरंगज़ेब के शासनकाल के दौरान, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में 25% से अधिक वैश्विक जीडीपी के लायक साम्राज्य, भारतीय उपमहाद्वीप के लगभग सभी को नियंत्रित करता था, पूर्व में चटगाँव से लेकर पश्चिम में काबुल और बलूचिस्तान तक, उत्तर में कश्मीर। दक्षिण में कावेरी नदी बेसिन।


मुगल वंश की वंशावली। चार्ट में प्रत्येक सम्राट की केवल प्रमुख संतानें ही प्रदान की जाती हैं।

उस समय इसकी जनसंख्या का अनुमान 110 से 150 मिलियन (दुनिया की आबादी का एक चौथाई) के बीच है, जो 4 मिलियन वर्ग किलोमीटर (1.2 मिलियन वर्ग मील) से अधिक के क्षेत्र में है। 18 वीं शताब्दी के दौरान मुगल शक्ति तेजी से घटती गई और अंतिम सम्राट, बहादुर शाह द्वितीय को 1857 में ब्रिटिश राज की स्थापना के साथ हटा दिया गया।

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मुग़ल बादशाहों की सूची[संपादित करें]

मुग़ल सम्राटों की सूची कुछ इस प्रकार है।

  • बैंगनी रंग की पंक्तियाँ उत्तर भारत पर सूरी साम्राज्य के संक्षिप्त शासनकाल को दर्शाती हैं।
  • भारत मे मुगलो का वंश[1] का सन्सथापक बाबर के दृरा हुआ था। बाबर एव उसके उतराधिकारी मुगल शासक तुर्क एव सुन्नी मुसलमान थे। बाबर एक मुगल सासक था। जिसने भरत मे मुगलो के सासक के साथ पद‌-पादशाही को धारन किया था।
  • बाबर के बाद कई पिढ़ी मुगलो के भारत पर शासन किये थे।
  • जिनमे से अकवर एक महान शासक साबीत हुआ था।
चित्र नाम जन्म नाम जन्म राज्यकाल मृत्यु टिप्पणियाँ
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बाबर
بابر
ज़हीरुद्दीन मुहम्मद
ظہیر الدین محمد
14 फ़रवरी 1483 20 अप्रैल 1526 – 26 दिसम्बर 1530 26 दिसंबर 1530 (आयु 47)
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हुमायूँ
ہمایوں
नसीरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ
نصیر الدین محمد ہمایوں
(पहला राज्यकाल)
6 मार्च 1508 26 दिसम्बर 1530 – 17 मई 1540 27 जनवरी 1556 (आयु 47)

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हुमायूं का मकबरा

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शेर शाह सूरी
شیر شاہ سوری
फ़ारिद खान
فرید خان
1486 17 मई 1540 – 22 मई 1545[2] 22 मई 1545
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इस्लाम शाह सूरी
اسلام شاہ سوری
जलाल खान
جلال خان
1507 27 मई 1545 – 22 नवम्बर 1554[3] 22 नवम्बर 1554
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हुमायूँ
ہمایوں
नसीरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ
نصیر الدین محمد ہمایوں
(दूसरा राज्यकाल)
6 मार्च 1508 22 फ़रवरी 1555 – 27 जनवरी 1556 27 जनवरी 1556 (आयु 47) 1540 में सुरी वंश के शेर शाह सूरी द्वारा हुमायूं को उखाड़ फेंक दिया गया था, लेकिन इस्लाम शाह सूरी (शेर शाह सूरी के पुत्र और उत्तराधिकारी) की मृत्यु के बाद 1555 में सिंहासन लौट आया था।
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अकबर-ए-आज़म
اکبر اعظم
जलालुद्दीन मुहम्मद
جلال الدین محمد اکبر
15 अक्टूबर 1542 11 फरवरी 1556 – 27 अक्टूबर 1605 27 अक्टूबर 1605 (आयु 63)
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जहांगीर
جہانگیر
नूरुद्दीन मुहम्मद सलीम
نور الدین محمد سلیم
31 अगस्त 1569 3 नवंबर 1605 – 28 अक्टूबर 1627 28 अक्टूबर 1627 (आयु 58)
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शाह-जहाँ-ए-आज़म
شاہ جہان اعظم
शहाबुद्दीन मुहम्मद ख़ुर्रम
شہاب الدین محمد خرم
5 जनवरी 1592 19 जनवरी 1628 – 31 जुलाई 1658 22 जनवरी 1666 (आयु 74)

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शाहजहां की कब्र

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अलामगीर

(औरंगज़ेब)
عالمگیر

मुइनुद्दीन मुहम्मद
محی الدین محمداورنگزیب
3 नवम्बर 1618 31 जुलाई 1658 – 3 मार्च 1707 3 मार्च 1707 (आयु 88)
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बहादुर शाह क़ुतुबुद्दीन मुहम्मद मुआज्ज़म

قطب الدین محمد معظم

14 अक्टूबर 1643 19 जून 1707 – 27 फ़रवरी 1712 27 फ़रवरी 1712 (आयु 68) उन्होंने मराठाओं के साथ बस्तियों बनाई, राजपूतों को शांत किया और पंजाब में सिखों के साथ मित्रता बनाई।
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जहांदार शाह माज़ुद्दीन जहंदर शाह बहादुर

معز الدین جہاں دار شاہ بہادر

9 मई 1661 27 फ़रवरी 1712 – 10 जनवरी 1713 12 फ़रवरी 1713 (आयु 51) अपने विज़ीर ज़ुल्फ़िकार खान द्वारा अत्यधिक प्रभावित।
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फर्रुख्शियार फर्रुख्शियार

فروخ شیار

20 अगस्त 1685 11 जनवरी 1713 – 28 फ़रवरी 1719 19 अप्रैल 1719 (आयु 33) 1717 में ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी को एक फ़रमान जारी कर बंगाल में शुल्क मुक्त व्यापार करने का अधिकार प्रदान किया, जिसके कारण पूर्वी तट में उनकी ताक़त बढ़ी।
मुगल वंश का प्रथम संस्थापक कौन है? - mugal vansh ka pratham sansthaapak kaun hai?
रफी उल-दर्जत रफी उल-दर्जत

رفیع الدرجات

1 दिसंबर 1699 28 फ़रवरी – 6 जून 1719 6 जून 1719 (आयु 19)
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शाहजहां द्वितीय रफी उद-दौलत

رفیع الدولہ

जून 1696 6 जून 1719 – 17 सितम्बर 1719 18 सितम्बर 1719 (आयु 23)
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मुहम्मद शाह रोशन अख्तर बहादुर

روشن اختر بہادر

7 अगस्त 1702 27 सितम्बर 1719 – 26 अप्रैल 1748 26 अप्रैल 1748 (आयु 45)
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अहमद शाह बहादुर अहमद शाह बहादुर

احمد شاہ بہادر

23 दिसम्बर 1725 29 अप्रैल 1748 – 2 जून 1754 1 जनवरी 1775 (आयु 49) सिकंदराबाद की लड़ाई में मराठाओं द्वारा मुगल सेना की हार
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आलमगीर द्वितीय अज़ीज़ुद्दीन 6 जून 1699 3 जून 1754 – 29 नवम्बर 1758 29 नवम्बर 1759 (आयु 60)
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शाहजहां तृतीय मुही-उल-मिल्लत 1711 10 दिसम्बर 1759 – 10 अक्टूबर 1760 1772 (आयु 60-61) बक्सर के युद्ध के दौरान बंगाल, बिहार और ओडिशा के निजाम का समेकन। 1761 में हैदर अली मैसूर के सुल्तान बने;
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शाह आलम द्वितीय अली गौहर 25 जून 1728 10 अक्टूबर 1760 – 19 नवम्बर 1806 19 नवम्बर 1806 (आयु 78) 1799 में मैसूर के टीपू सुल्तान का निष्पादन
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अकबर शाह द्वितीय मिर्ज़ा अकबर या अकबर शाह सानी 22 अप्रैल 1760 19 नवम्बर 1806 – 28 सितम्बर 1837 28 सितम्बर 1837 (आयु 77)
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बहादुर शाह द्वितीय अबू ज़फर सिराजुद्दीन मुहम्मद बहादुर शाह ज़फर या बहादुर शाह ज़फर 24 अक्टूबर 1775 28 सितम्बर 1837 – 21 सितम्बर 1857 7 नवम्बर 1862 अंतिम मुगल सम्राट। 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद ब्रिटिश द्वारा अपदस्थ और बर्मा में निर्वासित किया गया।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • भारत के सम्राट

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

  • Adrian Fletcher's Paradoxplace - Great Mughal Emperors of India

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Singh, Adityaraj (2020-07-25). "मुगल साम्राज्य का इतिहास और मुगल बादशाहो से जुड़े रोचक जानकारी mughal empire family tree". HindwaFact (अंग्रेज़ी में). मूल से 25 जुलाई 2020 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2020-07-29.
  2. Majumdar, R.C. (ed.) (2007). The Mughul Empire, Mumbai: Bharatiya Vidya Bhavan, साँचा:Listed Invalid ISBN, p.83
  3. Majumdar, R.C. (ed.) (2007). The Mughul Empire, Mumbai: Bharatiya Vidya Bhavan, साँचा:Listed Invalid ISBN, pp.90–93

मुगल वंश का पहला शासक कौन था?

मुगल साम्राज्य 1526 में शुरू हुआ, मुगल वंश का संस्थापक बाबर था, अधिकतर मुगल शासक तुर्क और सुन्नी मुसलमान थे. मुगल शासन 17 वीं शताब्दी के आखिर में और 18 वीं शताब्दी की शुरुआत तक चला और 19 वीं शताब्दी के मध्य में समाप्त हुआ. (1) बाबर ने 1526 ई से 1530 ई तक शासन किया.

मुगल वंश में कितने शासक थे?

इस साम्राज्य की गद्दी कुल 19 सम्राटों ने संभाली थी। मुगल साम्राज्य का संस्थापक बाबर था जो मध्य एशिया से आया था।

मुगल वंश का संस्थान कौन थे?

बाबर ने १५२६ ई० में दिल्ली में मुगल–साम्राज्य की स्थापना की थी और इस वंश का अन्तिम शासक बहादुर शाह १८५८ ई० में दिल्ली के सिंहासन से हटाया गया था।

मुगल वंश का दूसरा शासक कौन था?

हुमायूं: मुगल साम्राज्य का दूसरा शासक था। हुमायूं का पहला शासन काल का सबसे बड़ा अवरोधक सूरी वंश के लोग थे, जिनसे हुमायूं युद्ध भी हार चुका था। हुमायूं को हराने वाले शेरशाह सूरी थे, जिन्होंने सूरी वंश की स्थापना भी की थी।